Monday, 2 March 2020

लाखों मिलेंगे आपको ऐसी कतार में

लाखों   मिलेंगे    आपको     ऐसी    कतार में
मिलती  नही   कहीं  भी   खुशी  है   उधार में

बर्बादियों  में   मेरे   तो   वो   भी   शरिक  था
गुजरी  है   उम्र   जिसके   फकत  इंतेजार  में

कीमत  हमेशा   ख्वाब  की   ज्यादा  रही  मेरे
औकात    कब    रहे    हैं    मेरे   इख्तियार में

गहरी  कही  है   जो  भी  कही   बात  यार  ने
रख्खा है  क्या  भला  कहो  नफरत में  रार में

हर शख़्स उलझनों में ही उलझा हुआ है जब
फुर्सत है  कौन  जिसके  है  नफरत विचार में

ताजिर  नफरतों  के  कुछ करते हैं मुझपे तंज
निखरा  हूँ   और   तप  के  मैं  यूँ  बार बार में

रिश्तों  के  दरमियाँ    न  यूँ   दीवार   किजिए
है  लुत्फ़  इक  अलग   जरा  अपनों से हार में

रख्खे  है   सर  पे   हाथ    मेरा  श्याम सांवरा
चलती  है     जिंदगी      इसी    दारोमदार  में

No comments:

Post a Comment