आजादी
चंद सिरफिरे ही थे जो लेकर आये थे उसे
फिर उनसे हाथ छुड़ा जाने कहां खिसक गई
अब सुनते हैं कि ठहरी है रसूखदारो के यहाँ
जो आ रही थी मुल्क में रास्ता भटक गई
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