Friday, 4 January 2019

मिला खूब हमको है धोखा यहीं पर

मिला खूब हमको  है धोखा यहीं पर
किया  शिद्दतों  से  भरोसा  यहीं पर

वफाओं का क्या खूब बदला दिया है
मरासिम लगा  अजनबी सा यहीं पर

किसे अब कहें  आशना है  ये हमसे
लगा गैर सा  सब ही  चेहरा यहीं पर

वो  तारों  भरी   रात  तन्हा  लगी है
मिला चांद  पागल भटकता यहीं पर

लगी भीड़ यूं तो शहर भर में लेकिन
जुबां सबकी  खामोश  देखा यहीं पर

चरागां किया  कोना कोना  शहर का
रहा  कैसे   बाकी  अंधेरा  यहीं  पर

कि  मुद्दत  हुई  चांद  गुजरे  यहाँ से
अभी तक  उजाला है ठहरा यही पर

सियासत  गई  है  पहुंच  हादसे तक
नही  क्यूँ ये  राहत है पंहुचा यहीं पर

शिकायत रही  खूब सबको ही हमसे
किया हमपे अक्सर ही चर्चा यहीं पर

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