212 212 212 212
क्या खता हो गयी क्यूँ गिले हो गये
कह रहे लोग हमको बुरे हो गये
फुरसतों के ये लम्हे कहर ढा रहे
अच्छे खासे भी अब सरफिरे हो गये
बात दिल की कही हमने दिल से मियां
आप क्यूँ इस तरह अनमने हो गये
दोष होता नही गलतियों का ही बस
गल्तफहमी में भी फासले हो गये
वक्त रहता नही है कहीं टीक कर
कल जो अपने थे अब गैर के हो गये
था न मुमकिन बदलना यूँ हालात को
मन बदल कर फिर हम ही नये हो गये
जिंदगी से तो अनबन रही उम्र भर
मौत से भी बहुत से गिले हो गये
देख उनको हुई है उदासी बहुत
क्या थे कल आज क्या देखिए हो गये
है वो रहजन नया है सलीका नया
तौर अब रहजनी के नये हो गये
कुछ उजालों में उनको गये भूल हम
वज्ह से जिनके रोशन दिये हो गये
देख कर रुख बदलती हवाओं की अब
जो पराये भी थे वो सगे हो गये
रहती है फिक्र बंदो की अपने उसे
रब को नाराज मत सोचिए हो गये
कब तलक हो सियासत की बातें मियां
छोड़िए ये पुराने धड़े हो गये
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