Wednesday, 16 October 2024

राम की धरती पे रावण की डमी स्वीकार की

2122 2122 2122 212 
राम की  धरती पे  रावण  की   डमी  स्वीकार की
क्यूँ  भला  हमने   सियासी  काहिली स्वीकार की /1/

चल रही   मजहब की   ठेकेदारियाँ  जिनकी उन्हें
पूछिए   क्यूँ   राम पर     बेहूदगी      स्वीकार की /2/

सर कलम मत कीजिए पर दीजिए कुछ तो सजा
धृष्टता   आराध्य पर     कैसे  कोई    स्वीकार की /3/

सोच  जिनकी   शह्र की  गलियों के  जैसी  तंग है
हमने  उनकी   रहनुमाई  क्यूँ  कभी  स्वीकार की /4/

खो गईं     सद्भावनाएँ         कुर्सियों के  खेल में
रहबरों ने  भी  बस अपनी  बेहतरी   स्वीकार की /5/

राम हैं आराध्य जन मानस के हैं अति पुज्यनीय
कैसे  हमने   राम पर   छींटा कशी   स्वीकार की /6/

लापता है  जिंदगी  कुछ  उलझनों  की  भीड़ में
अब  इसी  हालात में  सबने  खुशी  स्वीकार की /7/

मुस्कुराने  की  वजह  मिलती नही है  सहल ही
बेबसी में  मुफलिसी ने   मसखरी   स्वीकार की /8/

भीड़  गंगा में  लगी  रहती   नही  यूँ  ही   हुजूर
सबने अपने  पाप कर्मो की  बही   स्वीकार की /9/

खुशनसीबों में  स्वयं  को  हम समझने हैं  लगे
आपने  जब से   हमारी   दोस्ती    स्वीकार की /10/

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