झुठ खिलखिला रहा
सत्य मौन है
क्यूँ कि मेरे देश में
लोकतंत्र है
गलत को गलत कहना
भी यहा गलत है
क्यूँ कि मेरे देश में
लोकतंत्र है
देश तोड रहे है
अभिव्यक्ति के नाम पर
क्यूँ कि मेरे देश में
लोकतंत्र है
आजाद है गुनाहगार
निर्दोष बंद है
क्यूँ कि मेरे देश में
लोकतंत्र है
रोटी पर है बहस
मजहब बुलंद है
क्यूँ कि मेरे देश में
लोकतंत्र है
संसद है बंधक
जिम्मेदार चंद है
क्यूँ कि मेरे देश में
लोकतंत्र है
खबरे बिक रही है
चौक चौराहों पर
दाम लगा उठा लो
जो खबरे पसंद है
क्यूँ कि मेरे देश में
लोकतंत्र है
No comments:
Post a Comment