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जमाने में सबसे बुरा आदमी हूँ
जरा हूँ मैं इंसा जरा आदमी हूँ
मुकम्मल जरुरत की फेहरिस्त लेकर
मै बाजार को ताकता आदमी हूँ
कभी हसरतों की कबर खोदता हूँ
हकीकत से मै भागता आदमी हूँ
कहां तक करेगा रफूगर रफू अब
कि बस चिथड़े ढांपता आदमी हूँ
धरी आंच पर हर कदम जिंदगी ये
अजाबो से मै जूझता आदमी हूँ
हवाओं के रव में चला जा रहा हूँ
मै बस वक्त को भांपता आदमी हूँ
हिमाकत की हिम्मत न रखता हूँ पर भी
ये शह मात को जानता आदमी हूँ
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