Thursday, 10 October 2019

राम बनने की सभी में लालसा भरपूर है

राम  बनने  की    सभी में    लालसा  भरपूर है
राम  के  लक्षण से   हर  किरदार  कोसों दूर है

झूठ  मक्कारी  दिखावा  लोभ में  लिपटे  सभी
त्याग    मर्यादा    न संयम   नाम  भी  मंजूर है

फुल कर  कुप्पा  हुए हैं  दंभ से सब इस कदर
बस  बड़ा  दिखने की  चाहत में  ही सारे चूर है

बांटते   फिरते  हैं   साधू संत   मंदिर में  बहुत
घर  में  बैठे  बुढ़े मां  अर बाप  बस  मजबूर हैं

हक तो लेने के  सभी को  याद है इस मुल्क से
जब  निभाना  फर्ज हो  जज़्बे  सभी काफूर है

लाए हैं लिखवा  वसीयत में  शराफत हर कोई
फिर  गलत  ये कौन  करता है समझ से दूर है

फूंकते हर साल सब  रावण को  हर्षोल्लास से
फिर से  जी उठता है वो सदियों से ये दस्तूर है

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