Saturday, 9 January 2016

जीने के लिए सीधा सरल रास्ता नही मांगते

जीने के लिए  सीधा सरल रास्ता नही मांगते
मुश्किलात भी अपने लिए सस्ता नही मांगते

गुजर जाती है जूझते  गुमनाम जिंदगी यूं ही
मुफलिस कभी अखबार में चर्चा नही मांगते

सुकून की सुखी दो रोटी ईमान से मिल जाये
दाता से कोई फरमाईश औ बेजा नही मांगते

खुशियाँ उस घर  आंगन बरसती ही रहती है
बेटियों की कीमत पर जो    बेटा नही मांगते

बुढापा उस बाप का    तसल्ली से गुजरता है
बेटे जिसके बड़े होने पर  हिस्सा नही मांगते

मोहब्बत की बिसात जो रिश्ते कायम होते हैं
अपनो के ही   दरमियां वो धोखा नही मांगते

देख ली है जिंदगी की धुप छांव  सभी हमने
मुकद्दर से अब अपने लिए मौका नहीं मांगते

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