सजदा कौन करता है इबादत कौन करता है
मेरे खुदा आज कही मुहब्बत कौन करता है
तेरे शहर आने की हिमाकत कौन करता है
अपने सुकून से ऐसी शरारत कौन करता है
जिंदगी के दाम इतने गिर गए है आजकल
घाटे की कीमत पे तिजारत कौन करता है
भुख को ही खा जाये कोई दवा तो ऐसी बने
मुफलिसी पर इतनी भी नेमत कौन करता है
मौत की बढ़ती कीमत बेचैन किये हैं हमे
सौदेबाजी में तेरे यहां मुरव्वत कौन करता है
अपने हक से जो मिली वो खुशी अच्छी लगी
छिनी हुई खुशियों की चाहत कौन करता है
सर पर हाथ फेरे मां ने मै मुकम्मल हो गया
सुन ऐ फलक तेरी हिफाजत कौन करता है
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