Monday, 13 June 2016

कसमसाहट तिलमिलाहट बेबसी देखी गई

कसमसाहट ,तिलमिलाहट  बेबसी  देखी गई
दर्द में लिपटी हुई सी    हर जिंदगी देखी गई

सुरज रोज निकले है पर भी अंधेरा कायम है
सबके घर में आज उधार की खुशी देखी गई

दिलों के भीतर सबके ही पसरा है सन्नाटा सा
चेहरे पर हरेक के यहाँ लाचार हंसी देखी गई

सर गिरे हैं सजदे में     दिलों में है मलाल भरे
इस तरह से हो रही   इबादत बंदगी देखी गई

झीलों के शहर में रहकर पंछी प्यासे फिरते हैं
लोगों के दिलों में अजब सी तिश्नगी देखी गई

जिस्मो जां नही अपनी कोई शय कहां अपनी
कही और जा ठहरी    अपनी खुशी देखी गई

No comments:

Post a Comment