Thursday, 23 June 2016

सदियों तक किसकी अदायत कौन करता है

सदियों तक किसकी  अदायत कौन करता है
इतनी शिद्दत से आज मुहब्बत कौन करता है

सुब्ह की सुरत धुंधला जाती शाम आते-आते
अपने इश्क की ऐसी हिफाजत कौन करता है

कोई भी आता नही है  दैरो हरम के आस्ताने
अब यहां सजदा औ इबादत    कौन करता है

मुझको अपने घर बुला खुद घुमती है बेखबर
ऐ जिंदगी भला ऐसी  हिकारत कौन करता है

बेसब्री से बादलों का रस्ता देख रहा है सुरज
तपती धूप में उसकी सोहबत  कौन करता है

पिसता है ख्वाहिशों औ जरुरतों के दरमियां
उस आम इंसा जैसी हिमाकत कौन करता है

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