Wednesday, 2 November 2016

ख्वाब देखूंगा तो अखबार मे आ जायेगा

ख्वाब देखूंगा तो अखबार मे आ जायेगा
कुछ हकीकत  सरेबाजार मे  आ जायेगा

मै सांसे भी लेता हूँ  तो जमाने से छिपके
वरना कल वो भी इश्तेहार में आ जायेगा

मै मुफलिस इक मुद्दा हूँ सियासत के लिए
मेरे ये  हालात भी  दरकार में  आ जायेगा

मेरे हर निवाले पर भी  नजर रखी जायेगी
मेरा  किरदार भी  सरोकार में  आ जायेगा

बेबसी की  तस्वीरें मेरी  बिकेगी बाजारों में
ये मेरा  जिस्म भी  कारोबार में आ जायेगा

मेरे कांधो पे  चढ़ करके  शहर का  "लुच्चा"
कल को देख लेना  सरकार में  आ जायेगा

मत कर  गुस्ताखी   ऐ सुखनवर  तू रहने दे
वरना तेरा नाम भी गुनहगार में आ जायेगा

अभी जो बाकी है वजूद जरा जुदा सा तेरा
तू भी इस शहर के रिश्तेदार में आ जायेगा

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