दर बदल जाते हैं दीवार बदल जाते हैं
देखते ही देखते बाजार बदल जाते हैं
सारा ही शहर ये अजनबी सा दिखता है
हल्के वजूद देख पैरोकार बदल जाते हैं
सच के तिजारत मे अब बरकत नही है
घाटा होने देख कारोबार बदल जाते हैं
घर के आंगन बुढा सा पेड दोस्त है मेरा
मिला सुकून उससे जो यार बदल जाते हैं
पिता से भी मिलती है तो पति से पुछकर
बिदाई बाद बेटी के हकदार बदल जाते हैं
थाल सजाए बैठी ही रह जाती है बहना
बाट जोहते भाई के त्योहार बदल जाते हैं
तुम्हारे शहर मेरे भी कुछ रिश्ते बसते थे
हालात के साथ ही किरदार बदल जाते हैं
मौला दे माफी ये बच्चे जरा भुलक्कड़ है
घर गृहस्थी मे इनके संस्कार बदल जाते हैं
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