Saturday, 7 September 2019

नाराज अपने आप से खुद से खफा हूँ मैं

221 2121 1221 212
नाराज अपने आप से खुद से खफा हूँ मैं
रिश्तों के दरमियां ही हूँ सबसे जुदा हूँ मैं

ये जिस्मो खाक से कोई खुद को संवार ले
इतना न अपने आप में भी अब बचा हूँ मैं

मत दो मुझे खैरात उजाले जरा से तुम
जुगनू से ना मिटेंगे अंधेरा घना हूँ मैं

गुम है सुकून चैन अमन शहर से मियां
आलम ये दहशतों का कहां सो रहा हूँ मैं

अंगड़ाई जुल्फ आईना ख्वाबों गुलाब चांद
अब मुफलिसी से टूट सभी को भुला हूँ मैं

सजदा  इबादतें  ये  जियारत  है  राएगा
उलझी सी जिंदगी है ये उलझा हुआ हूँ मैं

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