Sunday, 22 September 2019

हालात जरा बद है ये बदतर तो नही है

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हालात  जरा  बद  है  ये  बदतर  तो नही है
है  शुक्र  किसी  हाथ  में  पत्थर  तो नही है

कुछ लोग खफा हैं जरा सिस्टम से यहां पर
ये  मामला  है घर का  कोई  डर  तो नही है

है  फिक्र में  सरकार  न तु  फिक्र  जरा कर
फाका कशी  दो चार  ये  दुष्कर  तो नही है

गर  झांकता है  शम्स सुराख़ो से हुआ क्या
छप्पर है  तेरे  सर पे   तु   बेघर  तो नही है

हर  एक  निवाले  पे  नजर  हुक्मरां  की है
कुछ  कह रहे हैं  ये कोई  महशर तो नही है

जमहूर     जमुरे  की  तरह     नाच  रहा है
अच्छे दिनों से   ये कोई  कमतर तो नही है

लगता है उसे  दोष सभी   लड़कियों  में है
घर उसके पता कर जरा  दुख्तर तो नही है

मिलने को  चले  आए हैं  कुछ रब्त  पुराने
तस्कीन  करो  पहलू  में  खंजर  तो नही है

बस आग उगलते है  सहर शाम  तलक वो
देखो  तो   कहीं  पेट में   अख्तर तो नही है

ख्वाहिश है  सभी  दर्द  मै  गंगा  में  बहा दूं
पर दिल से है निस्बत  कोई बेघर तो नही है

नाकामियों से  खौफ  न खा हौसला तु रख
मंजिल  की है  तु राह में  दर दर  तो नही है

घबराए से  कुछ लोग  यकीनन है  यहां पर
इतनी ही  गनीमत है  वो थर थर तो नही है

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