Tuesday, 17 September 2019

ख्वाब देखूंगा तो अखबार में आ जाएगा

2122 1122 1122 22
ख्वाब  देखूंगा  तो  अखबार  मे  आ जायेगा
कुछ  हकीकत   सरेबाजार  मे   आ  जायेगा

सांस   लेता हूँ    जमाने से  छिपा  कर के  मै
वरना कल को वो भी इश्तेहार में आ जायेगा

मै हूँ मुफलिस इक मुद्दा हूँ सियासत के लिए
तंग   हालात   भी    दरकार में   आ जायेगा

हर  निवाले  पे   नजर   मेरी   रखी   जायेगी
मेरा   किरदार     सरोकार  में    आ  जायेगा

बेबसी    बिकने    लगेंगी   मेरी   चौराहों पर
मेरा  ये  जिस्म भी   व्यापार  में  आ जायेगा

मेरे कांधो  पे ही चढ़ कर के शहर का लुच्चा
देख लेना  अब कि  सरकार में   आ जायेगा

ऐ सुखनवर   तू न गुस्ताखी   यूँ कर  रहने दे
राएगा    तु भी    गुनहगार   में   आ जायेगा

है  अभी   अलहदा   किरदार  जुदा है सबसे
तू भी  इस शहर के   संस्कार में  आ जायेगा

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