1222 1222 1222 1222
रही है उम्र भर ये जिंदगी अखबार क्या कहिए
तकाजे रोज हैं दहलीज़ पे लाचार क्या कहिए/1/
जरूरत की रही सांसे हमेशा रह्न ही अक्सर
बिकी हैं ख्वाहिशें सब की यहां हर बार क्या कहिए/2/
जिधर भी देखिए रौनक बड़ी माहौल जगमग है
मगर कायम अभी भी है यहाँ अंधकार क्या कहिए/3/
न देखो राह सूरज की सहर हो जाएगी वरना
उजाले जूगनुओं से ही करो अब यार क्या कहिए/4/
जला पुतलों को ही बस खुश जमाना हो रहा है अब
अजब है ये रवायत और अजब किरदार क्या कहिए/5/
निभाने अब लगे हैं लोग भी रस्मन हंसी ठठ्ठा
न आते हैं वो पहले की तरह त्यौहार क्या कहिए/6/
कवायद है अजब सब की बुराई खत्म हो अब तो
बिके है शहर में रावण गजब बाजार क्या कहिए/7/
पड़ा है जर्द सा वो चाँद तुमको देख कर कब से
बड़ा ही सुर्ख था सुन तजकिरा ए यार क्या कहिए/8/
वहां तो गंध भी बारूद की आती फिजाओं में
रहा कल खुश्बूओं से जो बड़ा गुलजार क्या कहिए/9/
अदावत के बहाने खूब है अब पास सबके ही
निगाहों में नजर आता नही है प्यार क्या कहिए/10/
यहां बस जोर है मजहब पे सबका ही जिधर देखो
बढ़ी है मुल्क में ये ही वजह तकरार क्या कहिए/11/
छिपाए फिरते हैं पहलू में ही खंजर यहांँ सारे
करोगे क्या किसी पे अब भला एतबार क्या कहिए/12/
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