221 2121 1221 212
नाराज़ अपने आप से खुद से खफा हूँ मैं
रिश्तों के दरमियाँ हूँ पर सबसे जुदा हूँ मैं/1/
इस जिस्मो खाक से कोई खुद को संवार ले
इतना न अपने आप में भी अब बचा हूँ मैं/2/
खैरात मत मुझे दो उजाले जरा से तुम
जुगनू से न मिटूंगा अंधेरा घना हूँ मैं/3/
गुम है शहर से आजकल अम्नो सुकून चैन
आलम है दहशतों का नही सो रहा हूँ मैं/4/
अंगड़ाई जुल्फ आईना ख्वाबों गुलाब चांद
बदला जो वक़्त भूल सभी कुछ गया हूँ मैं/5/
सजदा इबादतें ये जियारत है राएगाँ
उलझी सी जिंदगी है व उलझा हुआ हूँ मैं/6/
मुद्दत से हूँ तलाश में अपने वजूद की
जाने हुआ क्या ऐसा कहाँ गुमशुदा हूँ मैं/7/
No comments:
Post a Comment