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लगी है होड़ जहाँ पर खरीद की साहब
किसे है याद कहानी हमीद की साहब/1/
हमारी थाली में बस चांद उतर नही पाता
नही है हमको इजाजत ही दीद की साहब/2/
पहन लिया है पुरानी कमीज ही धोकर
रवायतें तो निभानी है ईद की साहब/3/
तमाम यार नदारद हुए अचानक से
भनक लगी उन्हें जब कुछ उमीद साहब/4/
सदा पकड़ते हैं कमजोर नब्ज़ अपने ही
करें अब आस भला क्या नवीद की साहब/5/
ख़बीस पर मची हैहान देख कर भारी
सिसक पड़ी है शहादत शहीद की साहब/6/
हर एक लम्हों की रखता है वो खबर सबकी
नही है उसको जरुरत रसीद की साहब /7/
नवीद - अच्छी खबर
ख़बीस - नीच
हैहान - हाय तौबा
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