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विशाल वट की जड़ों को ढूंढो
कि जिसका कोई पता नही है
करो जरा साफ तुम वो तस्वीर
जिसमें अब धूल सी जमी है
है कैसी मिट्टी की गंध तुझमे
व कौन सी अपनी सरजमीं है
जुबान किसकी है सर चढ़ी ये
जो अपनी भाषा है कौन सी है
अब अर्थ भूला है माँ का बेटा
कि भाई भाई में दुश्मनी है
विपत्तियाँ देख भागे रिश्ते
नियत सभी की बदल चुकी है
बढ़ा रहे बाल अपने लड़के
व लड़कियाँ छोटे कर रही है
कि देख फैशन के दौर इंसानियत
वतन छोड़ जा चुकी है
समझता खूद को है बाप बेटा
ये बेटियाँ नानी बन गयी हैं
जमाना कैसा बदल गया है
तरक्कियाँ सब नयी नयी हैं
पढ़ाते हैं अब तो पाठ चेले
गुरू की अब अहमियत नही है
बदल रहा देश अब है मेरा
परंपराएं बदल रही हैं
भूला के संस्कार अपने देखो
कहाँ ये दुनिया पहुंच गयी है
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