जिंदगी खैर कर तलब अपनी
मै तेरा जहर पी के जीता हुं ..!
ख्वाहिशों के लिबास पर जरूरतो के पैबंद
सांसो के धागे से दिन रात सिता हूँ..!!
No comments:
Post a Comment