Tuesday, 28 July 2015

खयाल

खयालो मे वो आते ही रहे अक्सर
हकीकत में उनसे कभी आया न गया

दिल में है उनके क्या ये तो वो ही जाने
मगर हमसे वह शख्स कभी भुलाया न गया

ताहयात किये जिन पर जां निसार हम
हाले दिल पर उनसे आंसू बहाया न गया

हम रूबरू न हो रजा ऐसी उनकी ही थी
बाजारों में मगर उनसे चेहरा छुपाया न गया

मेरी दीवानगी के चर्चे करता है वो मजे ले लेकर हमसे तो कभी उनका राज कोई सुनाया न गया

नाराजगी ताउम्र की मौत से भी न दुर हुई
हमारी कब्र पर उनसे दो फुल भी चढाया न गया

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