अपनी भी है ख्वाहिश
कोई दिल का मसीहा तो मिले
खोये रहे जिसमें सदा
ऐसा कोई जहां तो मिले
जिक्र करे जो सिर्फ हमारा
ऐसी कोई जुबां तो मिले
करे अपने भी दिल से दिल्लगी
ऐसा कोई इंसा तो मिले
जेहन पे जो छाप छोड़ जाये
ऐसा हसीन धोखा तो मिले
अपनी भी है ख्वाहिश हमे
कोई दिलरूबा तो मिले
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