दिल की बात दिल में रह गई
लब रहे खामोश सदा
नजरो से वो समझ सके न
मेरे दिवाने दिल की सदा
दुर से ही तकते उन्हें
कभी न उनका रूबरू हुआ
खबर न हुई उन्हें जरा भी
नजरो ने कर दी उल्फत अयां
निगाह उनकी हुई न हम पर
गुजरे करीब से कई मर्तबा
हम उन्हें गुजरते तकते रहे
बन कर पत्थर बेजुबां
बहुत बढ़िया
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