Tuesday, 28 July 2015

दिल की बात

दिल की बात दिल में रह गई
लब रहे खामोश सदा

नजरो से वो समझ सके न
मेरे दिवाने दिल की सदा

दुर से ही तकते उन्हें
कभी न उनका रूबरू हुआ

खबर न हुई उन्हें जरा भी
नजरो ने कर दी उल्फत अयां

निगाह उनकी हुई न हम पर
गुजरे करीब से कई मर्तबा

हम उन्हें गुजरते तकते रहे
बन कर पत्थर बेजुबां

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