दैरो हरम के नाम पे बरगला रहे हैं कुछ लोग
नफरतों की नई फसल उगा रहे हैं कुछ लोग
शहर में हवायें अब कुछ गर्म सी बहने लगी है
चिंगारियों को फुंक से दहका रहे हैं कुछ लोग
खामोशी से आती है शहर में बारिश आजकल
दहशतगर्दी फिजूल में फैला रहे हैं कुछ लोग
परदों से नही बच पायेगी अब आबरू घर की
सुराखों पर भी अब सेंध लगा रहे हैं कुछ लोग
हम ही मुकर्रर हो गये क्या हर इम्तिहाँ के लिए
हमारा पता मुश्किलों को बता रहे हैं कुछ लोग
आसमां छुने के खातिर इक परिंदा आमादा है
रास्ता रोक उसके पंख जला रहे हैं कुछ लोग
नक्शा उठाके देख लिया हमें कहीं दिखा नही
मुहब्बतो का इक शहर बता रहे हैं कुछ लोग
No comments:
Post a Comment