चाहा था हमने हमें भी गम मिले जरा सा
गम मिला हमें इतना दम रह गया जरा सा
कभी दिल में ही रोये कभी आंसू बहा लिये
कभी गम छुपाने को मुस्कुरा लिए जरा सा
हकीकत जान ख्वाब में ही खोये रहे सदा
टुटे ख्वाब जो निकला आफताब जरा सा
कसूर किसका कहें तकदीर है अपनी ऐसी
सभी लोग है अच्छे बुरे हम ही हैं जरा सा
उठाये नाज सारे उनके सदा हंसते हंसते
खफा हो गये जो रोेकर कहा दर्द जरा सा
सब पूछते हैं हमसे उदासियों का सबब
उन्हें नजर न आया दर्द चेहरे का जरा सा
सितम उन्हें लगते हैं अपने बहुत ही थोड़े
कहते हैं हमने तुम्हें तडफाया है जरा सा
कहते हैं हमे वो कमजोर हो तुम दिल के
करते हो जो इश्क दर्द भी सहो जरा सा
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