खयालो मे तो वो आते ही रहे अक्सर
हकीकत में उनसे कभी आया न गया
दिल में है उनके क्या ये तो वो ही जाने
हमसे वो शख्स कभी भुलाया न गया
ताहयात किये जिन पर जां निसार हम
हालेदिल पे उनसे आंसू बहाया न गया
हम रूबरू न हो रजा ऐसी उनकी थी
बाजारों में मगर चेहरा छुपाया न गया
मेरी वहशत के चर्चे करता है वो मजे से
हमसे कभी उनका राज सुनाया न गया
नाराजगी ताउम्र की मौत से भी न दुर हुई
मेरी कब्र पे उनसे दो फुल चढाया न गया
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