Wednesday, 6 April 2016

रात में तारों भरी रात ने सोने नही दिया

रात में तारों भरी रात ने सोने नही दिया
बेबस चांद के हालात ने सोने नही दिया

आपको भी मुहब्बत है कि नही है हमसे
ऐसे मासूम खयालात ने सोने नही दिया

कैसे मर मर  गुजरी है जिंदगी तुझ बिन
बेरब्त से ऐसे जज्बात ने सोने नही दिया

कितने बेताब थे    तेरे दिदार की चाहत
ख्वाबों में   मुलाकात ने सोने नही दिया

बिलखती रही हसरतें   यतीमों की तरह
चंद चुभते   सवालात ने सोने नही दिया

गुजारी जो तेरे साथ खयालों की जिंदगी
बीते उन हंसी लमहात ने सोने नही दिया

शिद्दत से तुझे याद करते गुजरे दिन रैन
मुद्दत से    मुश्किलात ने सोने नही दिया

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