अजब से हालात है गजब मुश्किलात है
कट रही है जिंदगी वाह वाह क्या बात है
जरुरतों के मोल जो रोज नीलाम हो रहे
दिल के जज्बात है वाह वाह क्या बात है
निकलते ही रहते हैं ख्वाहिशों के जनाजे
चिंदी में औकात है वाह वाह क्या बात है
चेहरे बदल बदल कर रोज ही आ जाती
कैसी आफात है वाह वाह क्या बात है
दहशत भरे मंजर हैं हर हाथ में खंजर है
दिलों में घात है वाह वाह क्या बात है
खामोश हर जुबां कोई बोलता नही कुछ
कैसी ये जमात है वाह वाह क्या बात है
जागते बीतती रातें खोये खोये सारा दिन
उलझे खयालात है वाह वाह क्या बात है
कहने को यूँ तो घर में मेले जैसा मंजर हैं
तन्हाई सौगात है वाह वाह क्या बात है
हर इक लफ्ज़ को हजार मतलब पहनाये
खुद से मुलाकात है वाह वाह क्या बात है
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