है शिकायत तो बहुत दिल में मगर जाने दे
रोज की बात है ये बात बिसर जाने दे
सोच लोगों की ये मजहब से इतर जाने दे
बस ये मुद्दा है सियासत के नजर जाने दे
बात करनी थी जरा तुमसे मगर जाने दे
बाते कर लेंगें कभी फिर अभी घर जाने दे
बाद बरसो के तुझे हाट में कल देखा था
भर गया जिस्म जरा सा है मगर जाने दे
कुछ न बदला है तेरे बाद भी हमको देखो
आज भी जागते हैं रात को पर जाने दे
कल खयालों से मुलाकात हुई थी मेरी
पुछती थी वो पता तेरा मगर जाने दे
रात भर चांद तेरे छत पे रहा मंडराता
बस जरा देर को तू देख ले पर जाने दे
मुल्क के सारे ही मसले ये सुलझ जाएंगे
मसअलों तक तो ये मुद्दों को मगर जाने दे
फिर से तारीख चुनावों की निकल आयी है
ये ही अखबार में है रोज खबर जाने दे
जुगनूओ को यूँ इकट्ठे न करो हाथों में
अब इन्हे भी तो हिसारों के ईतर जाने दे
हादसे तो है सियासत की नजर में मुद्दे
अब मगर सोच यही पर ये ठहर जाने दे
बांध नेमत के गिरह घर से निकलते हैं हम
गर्दिशे ताकती हैं दूर से पर जाने दे
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