कल तेरी बात पर मै रोया हूँ
अपने हालात पर मै रोया हूँ
बाद मुद्दत के तुझको देखा है
इस मुलाकात पर मै रोया हूँ
हर जुबां पर है तजकिरा तेरा
ऐसी सौगात पर मै रोया हूँ
खुद को अब खोल भी नही सकता
ये मुश्किलात पर मै रोया हूँ
आशना हर कदम मिले तेरे
ये निशानात पर मै रोया हूँ
याद मुश्किल से अब तू आता है
ऐसे लम्हात पर मै रोया हूँ
भुलने को तुझे भुलाया था
दिल के जज्बात पर मै रोया हूँ
जिंदगी गर्दिशों में गुजरी है
पर न आफात पर मै रोया हूँ
मुख्तसर सी तमाम हसरत है
बस ये हैहात पर मै रोया हूँ
कुछ तो लम्हों की भी खताएं थी
वो ही अगलात पर मै रोया हूँ
और कितना यकीं दूं मै तुझको
अपने इस्बात पर मै रोया हूँ
अगलात - भूलें /इस्बात - साबित करना
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