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मुश्किल बड़ी है आज ये हर आदमी के साथ
कैसे बिताए जीस्त कहो दुश्मनी के साथ
चेहरा लगा के रोज नया फिरते आदमी
मिलने लगे हैं लोग भी अब दिल्लगी के साथ
शर्ते लगा न ऐसे तू हमपे ऐ जिंदगी
करना कुबूल है तो करो हर कमी के साथ
हसरत दबा के सीने में हर दर्द भूल कर
हमने गुजार दी है उमर सादगी के साथ
कागज पे राहतों की लगी भीड़ है मगर
आती है रोज रोज खबर खुदकुशी के साथ
खुश्बू उगाने वाले कहाँ लोग खो गए
मिलते हैं आज लोग फकत दुश्मनी के साथ
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