Friday, 15 March 2019

लहजा मिजाज नाज नजरिया बदल गया

लहजा  मिजाज  नाज  नजरिया बदल गया
महफिल में हमको देखा तो चर्चा बदल गया

क्या जाने  सोंच कर के वो नजरें झुका लिये
अपनो की  भीड़ में  कोई अपना बदल गया

तेरे  शहर में  अपने भी  यूं  तो  थे  मोतबर
उल्फत  हुई  जो  तुमसे  भरोसा  बदल गया

सुबह    जो  थे  हबीब   हुई  शाम खो गये
बदला जो वक्त  सब से ही रिश्ता बदल गया

जब  तक   हमारे  पास  थे  पहलू नशीं रहे
बिछडा जो हमसे यार तो  रुतबा बदल गया

हमको   सीखा  रहे  थे   सलीके  हयात के
खुद पे  पड़ी  जो बात  वो कैसा बदल गया

शामिल लहू तो सबके हैं इस सर जमीन पर
आयी  जो बात  फर्ज की  बंदा  बदल  गया

जिसने  सुना उसी ने कहा क्या गजब किया
उंगली   उठाई   आपने  मसला  बदल गया

कैसे    सुनाए    हाल   दिले   बेकरार  का
सबसे  निबाहने  में  ही  मौका  निकल गया

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