अबीर रंग महकते हैं यार होली में
बहक रही है नशे में बयार होली में
ए रंगरेज तेरा रंग चढ़ गया ऐसा
कोई भी चढ़ न सका फिर खुमार होली में
नया नया सा लगे हर तरफ जिधर देखो
हरेक शय में ही है तू शुमार होली में
मची है लूट खुशी लूट लो जी भर कर के
रहे न बाकी कोई भी उधार होली में
गली मुहल्ले में नुक्कड़ में चौक चौराहे
गुलाल हाथ में ताके शिकार होली में
हमारे शहर अभी मस्तियों का मौसम है
कदम कदम पे दिखे रंग यार होली में
कहीं पे भांग चढ़ी है किसी के सर पर ही
कहीं पे फाग की मस्ती है यार होली में
दिलों का मैल निकल कर सिसक रहा देखो
मिटा दे नफरतों को आज यार होली में
सभी के रंग बिरंगे शकल नजर आए
मिटे हैं भेद सभी अब की बार होली में
सने है कीच में गोबर में कोई नाली में
अजब चली है ये रंगी फुहार होली में
नथूनो तक ये अबीरो गुलाल फैले हैं
सभी के शक्ल में आया निखार होली में
दो चार पल को सही मन मुटाव भूले हैं
मना रहे हैं खुशी से त्योहार होली में
No comments:
Post a Comment