Friday, 12 April 2019

मुश्किल को मुश्किल ही बतलाना भूल जाते हैं

2212 2212 2212 12
मुश्किल को मुश्किल ही बताना भूल जाते हैं
जब खुद से मिलते हैं  जमाना भूल जाते हैं

उनसे ही पुछते हैं सबब रुठने के उनसे हम
हमको सितमगर  जब सताना भूल जाते हैं

जद्दोजहद में इस कदर उलझी है जिंदगी
रोते तो है आंसू बहाना भूल जाते हैं

उधडे हुए से दिख रहे रिश्ते तमाम ही
पैबंद हर इक पर लगाना भूल जाते हैं

ख्वाहिश को करके दफ्न पुरी की जरूरतें
अब फर्ज ये बच्चे निभाना भूल जाते हैं

हर मोड़ पर मिल जाते हैं अब दर्द भी नये
मिलकर नये से हम पुराना भूल जाते हैं

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