Thursday, 2 April 2020

फिर आयी सुबह देखो इक नई सी ही खबर लेकर

फिर आयी  सुब्ह देखो  इक नई सी ही  खबर लेकर
लिये  फिरते  यहां  कुछ लोग  पत्थर हाथ पर लेकर

फिजाओं  में  अजब  सी  गंध  फैली  है  मियां देखो 
फिरा करते हैं कुछ आलिम जुबां पर ही जहर लेकर

अंधेरों से  बगावत  की  हिमाकत  फिर  दिये ने  की 
चलो  देखें  कहाँ तक  फैलेगी  अब  ये  असर लेकर 

तमाशे    शहर   में   मेरे     नये  से    रोज    होते  हैं 
मदारी  रोज    आते  हैं    नये  अपने    हुनर   लेकर

कहाँ  तो  हौसला  ये  की  जमाने  से  भी  लड़  लेंगे 
मिले हैं वक्त पर वो सहमा सहमा  सा  जिगर  लेकर 

पड़ी  है   साजिशों  पर   नेमते   भारी  यहाँ  अक्सर 
निकलता  रोज  हूँ मैं  सुबह  संग  अपने मेहर लेकर

नया  अब   दौर  आया  है   नये  सब   तौर  आये हैं 
मिले हैं  दोस्त  भी  पहलू  में  ही  खंजर जबर लेकर
 
खड़ा  है  आज  भी  वो  ईंट गारों  का  बड़ा  खंड्हर
अजीजो खास रिश्ते चल दिये सब  अपना घर लेकर 

सहेजा  है   हर इक  लम्हा   गुजरते  वक्त  का  हमने
लिये  बैठे  उन्ही  यादों  को  हम अब  उम्र भर लेकर

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