Thursday, 2 April 2020

मुश्किल को मुश्किल ही बताना भूल जाते हैं

मुश्किल को मुश्किल ही बताना भूल जाते हैं 
खुद से  जब  मिलते हैं  जमाना भूल जाते हैं

उनसे ही  पुछते हैं  सबब रुठने के उनसे हम
हमको  सितमगर  जब  सताना भूल जाते हैं

जद्दो जहद में  इस कदर   उलझी है  जिंदगी
रोते  जो  है   आंसू  बहाना     भूल   जाते हैं

उधडे  हुए  से   दिख  रहे    रिश्ते  तमाम ही
पैबंद  हर  इक  पर    लगाना   भूल  जाते हैं

की ख्वाहिशे सब दफ्न  जिनके वास्ते  मियां 
अब  फर्ज  वो  बच्चे  निभाना  भूल  जाते हैं

हर  मोड़  पर  मिल जाते हैं अब दर्द भी नये 
मिलकर  नये  से  हम  पुराना  भूल  जाते हैं

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