मुश्किल को मुश्किल ही बताना भूल जाते हैं
खुद से जब मिलते हैं जमाना भूल जाते हैं
उनसे ही पुछते हैं सबब रुठने के उनसे हम
हमको सितमगर जब सताना भूल जाते हैं
जद्दो जहद में इस कदर उलझी है जिंदगी
रोते जो है आंसू बहाना भूल जाते हैं
उधडे हुए से दिख रहे रिश्ते तमाम ही
पैबंद हर इक पर लगाना भूल जाते हैं
की ख्वाहिशे सब दफ्न जिनके वास्ते मियां
अब फर्ज वो बच्चे निभाना भूल जाते हैं
हर मोड़ पर मिल जाते हैं अब दर्द भी नये
मिलकर नये से हम पुराना भूल जाते हैं
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