क्या गजब हैरानगी है जिंदगी
धूप भी है छांव भी है जिंदगी
दर्द आंसू आरज़ू उम्मीद से
कुछ जरा परेशान सी है जिंदगी
राम होना ही रहा आसान कब
उम्र भर वनवास की है जिंदगी
किस कदर घबरा रहे है खौफ़ से
देख कर हमको हंँसी है जिंदगी
ओढ़े फिरती है नजरियों के लिहाफ
क्या कहें शर्मींदगी है जिंदगी
यूँ दबोचे जा रही है फुरसतें
खुद से उकताने लगी है जिंदगी
बे असर निकली इनायत मेहरें
गर्दिशों में ही फंसी है जिंदगी
आ रहा सूरज हवा भी चल रही
आदमी की बस थमी है जिंदगी
जख्म दिल के है बहुत गहरे मगर
इक नयी उम्मीद भी है जिंदगी
अजनबी अनबुझ पहेली की तरह
हर कदम मुश्किल बड़ी है जिंदगी
यूँ भी रहती है सदा गुमसुम जरा
आजकल ठहरी हुई है जिंदगी
बेवफाई की है ये जिंदा दिली
बावफा बिल्कुल नही है जिंदगी
है मिली सांसों की कीमत पर हमे
वरना तो कुछ भी नही है जिंदगी
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