1212 1122 1212 22
न रंग और न कोई भी हाल अच्छा है
वो पूछते हैं हो कैसे सवाल अच्छा है
जो इश्तेहार से उम्मीद है वफादारी
मुगालता भी है अच्छा खयाल अच्छा है
कि बरहमन ने बताया था हाथ देखके कल
न हो हताश तेरा अब कि साल अच्छा है
चढ़ी बयार फिजाओं में मौसमी ऐसी
ये फाल्गुन का है रंगे जमाल अच्छा है
तरस रही है कुछ आंखें रंग और पिचकारी
न खेल पाने का होली मलाल अच्छा है
न घर में दाना है गुजिया बने तो कैसे बने
वो ठंडे चूल्हे पे हांडी कमाल अच्छा है
त्योहार देखके चेहरे उतर से जाते है
ये तंगदस्ती बेहाली का हाल अच्छा है
हर एक तर्फ ही रंगीनीयों का आलम है
हो झूठ चाहे ये मंजर कमाल अच्छा है
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