2122 2122 2122 212
खेलते बच्चो के हाथो गोटियाँ अच्छी लगी
माँ ने बांधी थी कभी जो चोटियां अच्छी लगी
कद से छोटे पैरहन में खूब है जद्दोजहद
इस तरक्की दौर में भी धोतियाँ अच्छी लगी
शहर की जद्दोजहद मशरूफियत के दरमियाँ
सीधे सादे गांव की पगडंडियाँ अच्छी लगी
दुसरो से छीन कर हमको खुशी मत दे खुदा
अपने हक जो भी मिले वो मस्तियाँ अच्छी लगी
क्या मजा है झूठ में और दिल फरेबी बात में
सच बयानी शख्सियत की यारियाँ अच्छी लगी
जगमगाती चौंधियाती रोशनी के दरमियाँ
गांव की वो टिमटिमाती चिमनियाँ अच्छी लगी
जंकफूड और फास्टफूडो के ये बदले दौर में
माँ ने दी जो सेंक बासी रोटियाँ अच्छी लगी
दिन चढे तक बिस्तरो से चिपकी शहरीयत से दूर
सुबह सूरज को नमन की रीतियाँ अच्छी लगी
साथ रख्खी थी वहां पर गीता भी कुरआन भी
हमको उस दूकान पर ये यारियाँ अच्छी लगी
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