कभी फुर्सत मिले तो मुल्क के हालात लिख देना
कि हैं बर्बादियां हर सिम्त ही दिन रात लिख देना
कहीं खुशहाल है मौसम कहीं बदहाल मंजर है
पशेमां हर घड़ी होते रहे जज्बात लिख देना
हवाओं ने बगावत के लिए है मांग ली माफी
चरागों ने अंधेरों से मिलाया हाथ लिख देना
है लथपथ खून से कपड़े मगर इंकार है फिर भी
महज है हादसा मत कत्ल की तुम बात लिख देना
नुमाईश है लगी बाजार में हर चीज बिकती है
खरीदी की अगर है आपकी औकात लिख देना
वजीफे वास्ते टेबल बदलते रह गयी अर्जी
मुसलसल चल रही आखों से वो बरसात लिख देना
तरसती है कहीं पर जिंदगी भी जिंदगी खातिर
कहीं पर जिंदगी लगती कोई सौगात लिख देना
यहां अब आदमी को आदमी से ही हुई दिक्कत
कयामत की यही तो है फकत शुरूआत लिख देना
बहुत ज्यादा कटिले तीर व्यंगो के चलाना मत
चुटिली हल्की-फुल्की भी कोई तो बात लिख देना
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