Thursday, 2 April 2020

कभी फुर्सत मिले तो मुल्क के हालात लिख देना

कभी  फुर्सत  मिले  तो  मुल्क के  हालात लिख देना
कि हैं  बर्बादियां  हर  सिम्त  ही  दिन रात लिख देना

कहीं  खुशहाल  है  मौसम   कहीं  बदहाल  मंजर  है
पशेमां   हर  घड़ी   होते  रहे   जज्बात   लिख   देना

हवाओं  ने  बगावत   के   लिए  है   मांग  ली  माफी
चरागों  ने   अंधेरों  से   मिलाया   हाथ   लिख   देना

है  लथपथ  खून से  कपड़े  मगर  इंकार है  फिर भी
महज है  हादसा  मत  कत्ल की तुम बात लिख देना

नुमाईश  है  लगी   बाजार  में   हर  चीज  बिकती है
खरीदी  की  अगर  है  आपकी  औकात  लिख देना

वजीफे   वास्ते    टेबल  बदलते    रह  गयी    अर्जी
मुसलसल चल रही आखों से वो बरसात लिख देना

तरसती  है  कहीं  पर  जिंदगी  भी  जिंदगी  खातिर
कहीं पर  जिंदगी  लगती  कोई  सौगात  लिख  देना

यहां  अब  आदमी  को आदमी  से  ही हुई दिक्कत
कयामत  की यही तो है फकत शुरूआत लिख देना

बहुत  ज्यादा  कटिले  तीर   व्यंगो  के  चलाना  मत
चुटिली  हल्की-फुल्की  भी  कोई तो बात लिख देना

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