Tuesday, 28 July 2015

डोली संग जनाजा

तु भी सज रही थी वहां
यहां मै भी संवारा जा रहा था

तेरी आँखों में अरमान था
मेरी आँखों में इंतजार था

तु लदी हुई थी गहनों से
मै लादा गया था फुलो से

तु लाल जोडे में सजी थीं
मै सफेद चादर में कैद था

तुझे चार ने उठाया कांधे पर
मै भी चार कांधो पर था

लांघा चौखट तुने घर का
मै भी घर से निकल पड़ा

तु साथ ले जा रही थी जमघट
मुझे हुजूम ले जा रहा था

शहनाइयाँ थी साथ तेरे
मेरे साथ खामोशी थी

तु रोते जा रही थी घर से
मै रोता छोड जा रहा था

तु जिंदगी से मिलने जा रही थी
मै जिंदगी से मिलकर जा रहा था

तेरी डोली रूकी जा पिया घर
मेरा जनाजा पहुंचा श्मशान घर

तु डोली से निकली बाहर
जनाजा पहुंचा मेरा चिता पर

तु उधर सेज पर बैठी
आग लगी मेरी चिता पर

पिया ने छुआ जब तेरा तन
तो मेरा तन चिता में झुलस गया

तु पिया की आगोश में थी
मै मौत की आगोश में था

जब शांत हुआ तुफान उधर
मेरी चिता भी हो गई राख

इस तरह एक और दास्तां
चिता में जलकर हो गई खाक

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