खबरे बिक चुकी है
इश्तेहार पढिये
जज्बातो की नीलामी
सरे बाजार पढिये
कैसे होती है इंसानियत
शर्मशार पढिये
बाइज्जत शहर के
दागदार पढिये
महफूज नही बेटी
मिलती नही है रोटी
लगे है शहर मे बडे
बाजार पढिये
न पेट मे है अतडी
न आंखो मे है पानी
मुर्दो की बस्ती है
अखबार पढिये
मुर्दो की बस्ती का
अखबार पढिये
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