Wednesday, 2 September 2015

बाबूजी


बाबूजी के कमीज से
एक धुली हुई परची मिली है

कुछ जरूरते लिखी थी 
जो धुल गये है अब

बाबूजी जो
ख्वाहिशें जुबां पर 
आने नहीं देते थे 
बच्चो की

पहले ही पुरी हो 
जाती थी

आज बेटो ने
उनकी जरूरतें 
किस्तो मे बांट रख्खी है

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