होंटो पे मुस्कान दिलो मे खाई है अपनो ने भी खुब रश्म निभाई है
कोने मे रोती पडी बुढी आंखे आज भी न आयी मां की दवाई है
आज वसीयत करने वाले है बाबूजी पहली बार इकट्ठे सारे भाई है"..
बाबूल के अंगना से अब उड जाना है दिल भरा हुआ है बेटी की सगाई है
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