Wednesday, 9 September 2015

होठों पे मुस्कान दिलो मे खाई है

होंटो पे मुस्कान दिलो मे खाई है
अपनो ने भी खुब रश्म निभाई है

कोने मे रोती पडी बुढी आंखे
आज भी न आयी मां की दवाई है

आज वसीयत करने वाले है बाबूजी
पहली बार इकट्ठे सारे भाई है"..

बाबूल के अंगना से अब उड जाना है
दिल भरा हुआ है बेटी की सगाई है

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