चाहे न नेमत अता कर तु गुजारिश है मौला बुराई न दे
न दे चाहे शोहरत ओ बुलंदी करम कर तु जग हंसाई ने दे
गुजरती है तेरे सदके जिंदगी चाहे किसी को दिखाई न दे
तेरे करम से रोशन जहां है कही भी तु गम की परछाई न दे
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