बात होती है अब कहां कोई
कुछ करता नही बयां कोई
लिये फिरता है आग सीने मे
इश्क पाले था कल जहा कोई
हर तरफ झुठ औ फरेब मिले
बोलो ढुंढे कहां वफा कोई
ख्वाब पलते रोज आंखो मे
सच की मिली नही दुकां कोई
बेवजा है तलाश ए दैरो हरम
राम मिलते है न खुदा कोई
जाने क्या थी बेबसी उनकी
यूँ न होता है बेवफा कोई
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