खुशीयाँ कही दिखाई न दे
दर्द किसी का सुनाई न दे
अंधे बहरो की बस्ती है ये
जप्त आंसूओ को रिहाई न दे
हकीकत बयानी यहा जुर्म है
कलम छिन ले रोशनाई न दे
जिधर देखिये मजहबी फसाद
अमन की भाषा सुनाई न दे
हंसी लब आस्तीने खंजर
दाता ऐसे पडोसी भाई न दे
मिल जुल रहे सभी प्रेम से
किसी से कोई रूसवाई न दे
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